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474 साल बाद बन रहा रक्षाबंधन का अद्भुत संयोग

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भाई बहनो के प्यार से भरा रक्षाबंधन का त्योहार इस वर्ष रविवार, 22 अगस्त को मनाया जाएगा. रक्षा बंधन का त्योहार श्रवण माह में मनाया जाता है, परन्तु इस बार के सावन पूर्णिमा पर धनिष्ठा नक्षत्र के साथ मनाया जाएगा. शोभन योग भी इस त्योहार को अति खास बना रहा है. ज्योतिषविदों का कहना है कि राखी में इस बार सालों बाद एक अच्छा महासंयोग बन रहा है. विद्वानों के मुताबिक, रक्षाबंधन का त्योहार राजयोग में पर रहा हैं. रक्षा बंधन के त्योहार पर इस बार भद्रा माह का साया भी नहीं रहेगा. जिसके कारण बहनें पूरे दिन भाई को राखी बांध सकेंगी. इस दौरान कुंभ राशि में गुरु की चाल उलटी रहेगी और इसके साथ चंद्रमा भी वहां मौजूद रहेगा. गुरु और चंद्रमा की इस युति से रक्षा बंधन पर गज केसरी योग बन रहा है. गजकेसरी योग से इंसान की महत्वाकांक्षाएं पूरी होती हैं. धन संपत्ति, मकान, वाहन जैसे सुखों की प्राप्ति होती है.

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गज केसरी योग से राजसी सुख और समाज में मान-सम्मान की भी प्राप्ति होती है. गज केसरी योग से उन्हें कोई लाभ नहीं होगा जिनकी कुण्डली में बृहस्पति या चंद्रमा कमजोर हो. कुण्डली में चंद्रमा और गुरु केंद्र में एक दूसरे की तरफ दृष्टि कर बैठे हों तो गज केसरी योग बनता है. यह योग लोगों को भाग्यशाली बनाता है. इसके अलावा, रक्षा बंधन पर सिंह राशि में सूर्य, मंगल और बुध ग्रह एक साथ विराजमान होंगे. सिंह राशि का स्वामी सूर्य है. इस राशि में मित्र मंगल भी उनके साथ रहेगा. जबकि शुक्र कन्या राशि में होगा. ग्रहों का ऐसा योग बेहद शुभ और फलदायी रहने वाला है. ज्योतिषविदों का कहना है कि रक्षा बंधन पर ग्रहों का ऐसा दुर्लभ संयोग 474 साल बाद बन रहा है. इससे पहले 11 अगस्त 1547 को ग्रहों की ऐसी स्थिति बनी थी जब धनिष्ठा नक्षत्र में रक्षा बंधन मनाया गया था और सूर्य, मंगल और बुध एकसाथ ऐसी स्थिति में आए थे.

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उस समय शुक्र बुध के स्वामित्व वाली राशि मिथुन में विराजमान थे. जबकि इस वर्ष शुक्र बुध के स्वामित्व वाली राशि कन्या में स्थित रहेंगे. ज्योतिषियों का कहना है कि रक्षा बंधन पर ऐसा संयोग भाई-बहन के लिए अत्यंत लाभकारी और कल्याणकारी रहेगा. जबकि खरीदारी के लिए राजयोग भी बेहद शुभ माना जाता है. रक्षा बंधन पर इस बार राखी बांधने के लिए 12 घंटे 13 मिनट की शुभ अवधि रहेगी. आप सुबह 5.50 से लेकर शाम 6.03 तक किसी भी वक्त रक्षा बंधन मना सकते हैं. वहीं, भद्रा काल 23 अगस्त को सुबह 5 बजकर 34 मिनट से 6 बजकर 12 मिनट तक रहेगा. इस दिन शोभन योग सुबह 10 बजकर 34 मिनट तक तक रहेगा और धनिष्ठा नक्षत्र शाम 7 बजकर 40 मिनट तक रहेगा. ऐसा कहते हैं कि धनिष्ठा नक्षत्र में पैदा होने वाले लोगों का भाई-बहन से रिश्ता बहुत खास होता है और इसीलिए रक्षा बंधन पर धनिष्ठा नक्षत्र को खास माना जा रहा है.

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