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Thursday, April 15, 2021
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देना पड़ेगा EMI का ब्याज, नहीं हुआ माफ, अगली सुनवाई शुक्रवार को।

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कोरोना वायरस के संक्रमण के आने के बाद लोगो की सुविधा के लिए सरकार ने बैंकों की EMI पर मोरेटोरियम का गाइडलाइन बनाया। शुरू में इसे 3 महीने तक के लिए लागू किया किया गया था लेकिन बाद में इसे 3 महीने और बढ़ाया गया। लोगों को 6 महीने तक ईएमआई अभी ना देकर बाद में देने की छूट दी गई है। सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें लॉकडाउन के दौरान लोन की किस्त के ब्याज में छूट की मांग की गई है।

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दरअसल कुछ कर्जदार EMI ब्याज के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की शरण में गए और ब्याज के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है। उनका कहना है कि वह बहुत परेशान हैं और लोन की किस्त भी नहीं दे पा रहे हैं, ऐसे में ब्याज वसूलना कहां का न्याय है।

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सुप्रीम कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान RBI ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि इस 6 महीने के अंतराल में अगर कोई अपने किसी भी तरह के लोन की EMI की भरपाई नहीं कर पाता है तो कोई भी बैंक कर्जदार पर दबाव नहीं बना सकते हैं और कर्जदार को डिफाल्टर भी नहीं माना जाएगा। साथ में किसी तरह की पेनाल्टी भी नहीं लगाई जाएगी और उनकी क्रेडिट भी खराब नहीं होगी, लेकिन इस 6 महीने का ब्याज लोगों को चुकाना पड़ेगा। RBI ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि अगर 6 महीने का ब्याज नहीं लिया गया तो बैंकों को 2 लाख करोड़ रुपए तक का घाटा हो सकता है। RBI ने कहा कि जबरदस्ती ब्याज माफ करवाना सही निर्णय नहीं होगा क्योंकि इससे बैंकों की आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ सकता है। अब इस मामले पर सुनवाई शुक्रवार को होगी।

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लोगों को उम्मीद है कि शायद इस 6 महीना का ब्याज भी नहीं देना पड़ेगा लेकिन फिलहाल ऐसे आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं।

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