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कई सालो के बाद रक्षाबंधन में बन रहा गज केसरी योग

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हिन्दू परम्परा में रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहनों के प्रेम का प्रतीक माना जाता है. यह पर्व हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाइयों की समृद्धि और लंबी आयु के लिए, उनकी कलाई पर राखियां बांधती हैं और भाई भी अपनी बहनों को उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं और उपहार देते हैं. हिन्दू पंचांग अनुसार, रक्षाबंधन का पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. इस वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि और समय 21 अगस्त (शनिवार) शाम 7 बजकर 3 मिनट से आरंभ होगी और उसकी समाप्ति अगले दिन 22 अगस्त (रविवार) शाम 5 बजकर 33 मिनट पर होगी. ऐसे में इस वर्ष ये पर्व 22 अगस्त को धूमधाम के साथ मनाया जाएगा. रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त 22 अगस्त 2021 (रविवार) को हैं. राखी बांधने का मुहूर्त- सुबह 06 बजकर14 मिनट से शाम 05 बजकर 33 मिनट तक हैं. शुभ मुहूर्त की अवधि 11 घंटे 18 मिनट की है.

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हर साल रक्षाबंधन का त्योहार श्रवण नक्षत्र में मनाया जाता था. लेकिन इस बार यह सावन पूर्णिमा के धनिष्ठा नक्षत्र में मनाया जाएगा. इस बार राखी पर भद्रा कि परछाई भी नहीं पड़ेगी और इस बार सभी बहनें पूरा दिन अपने भाई को राखी बांध सकती हैं. साथ ही रक्षाबंधन के दिन कुंभ राशि में गुरु की चाल उलटी रहेगी और इसके साथ चंद्रमा भी वहां मौजूद रहेगा. विद्वानों का कहना है कि इस बार रक्षाबंधन पर सिंह राशि के लोगो पर सूर्य, मंगल और बुध ग्रह एक साथ विराजमान रहेंगे. सिंह राशि का स्वामी सूर्य है. इस राशि में मित्र मंगल भी उनके साथ मौजूद रहेंगे. इसी के साथ शुक्र कन्या राशि में होगा. ग्रहों का ऐसा सयोग बहुत ही शुभ और फलदायी माना जाता है. ज्योतिष सस्त्रो की मानें तो रक्षाबंधन पर ग्रहों का ऐसा दुर्लभ संयोग 474 साल बाद बन रहा है. इससे पहले 11 अगस्त 1547 को ग्रहों की ऐसी स्थिति बनी थी. इसी के साथ गुरु और चंद्रमा के मिलन से इस रक्षाबंधन पर गजकेसरी योग बन रहा है. जब चंद्रमा और गुरु केंद्र में एक दूसरे की तरफ दृष्टि कर बैठा होता है तो यह योग बनता है और यह योग लोगों को भाग्यशाली बनाता है. इससे लोगों की धन संपत्ति, मकान, वाहन जैसे सुखों की प्राप्ति होती है. गज केसरी योग बनने से राजसी सुख और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है.

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