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Monday, April 19, 2021
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राखी में चीन को करीब 4 हजार करोड़ का झटका।

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इस साल पर्व और त्यौहार भी कोरोना से अछूता नहीं रहने वाला है। रक्षा बंधन आने वाला है। बहन अगर शहर से दूर रहती है तब दूर दूर से भाई अपनी बहन से राखी बंधवाने आते हैं लेकिन इस साल लॉक डाउन की वजह से कई भाई अपनी बहन के पास इस पवित्र त्यौहार को मानाने नहीं पहुंच पाएंगे। इस साल राखी में चीन को भी जबरदस्त झटका लगने वाला है और इसका असर राखी के बाजार में भी दिखने भी लगे हैं। रक्षाबंधन पर बाजार में चीन में बनी या चीनी कच्चे माल से बनी राखियों का नज़ारा दिखाई देता था लेकिन इस साल सिर्फ भारत में बनी स्वदेशी राखियां ही दिख रही हैं। दरअसल चीन के सामानों का बहिष्कार भारत के व्यापारियों ने कुछ दिन पहले से ही सुरु कर दिया है। गलवान की घटना के बाद लोगों के साथ-साथ छोटे बड़े कारोबारी भी चीन से बना कोई भी सामान न ही खरीदना चाहते हैं और ना बेचना चाहता हैं।

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चीन के सामानों के बहिष्कार के लिए पहले से ही CAIT (कैट) का गठन हो चूका है और कैट ने इस दिशा में अभी तक बेहतरीन काम किया है। कैट के मुताबिक हर साल रक्षा बंधन के त्यौहार पर लगभग 6 हज़ार करोड़ की राखियों का व्यापार होता है, जिसमें चीन की 4 हज़ार करोड़ की बनी राखियां भारत के बाजारों में बिकती थी। चीन भारत को रक्षा बंधन में राखियां और राखी बनाने का सामान जैसे कि फोम, डोरी, मोती आदि निर्यात करता था। भारत के लगभग हर त्यौहार पर चीन द्वारा निर्मित सामान भारतीय बाजार में बहुत बड़े पैमाने पर बिकता था लेकिन गलवान में हुई हिंसा के बाद भारत के त्योहारों में चीन के व्यापार की अब कोई जगह नहीं है। यह भारत के व्यापारियों, स्वदेशी उद्योगों और देश की उन्नति के लिए एक अच्छे संकेत हैं।

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भारतीय ग्राहक भी अब लोकल उद्योग को बढ़ावा देना चाहते हैं इसीलिए लोग अब चीन के सस्ते सामानों को छोड़ लोकल में बने भारतीय सामने के लिए ऊँची कीमत तक देने को तैयार है। लोग इस साल भारत में बनी स्वदेशी राखियां ऊँचे दाम में भी ख़ुशी ख़ुशी खरीद रहे हैं। भारत के लोग भी चाहते हैं की चीन के सामानों का पूर्ण बहिष्कार हो। इसके लिए भारत में जगह जगह प्रदर्शन भी हुए। भारत सरकार ने भी चीन को जबरदस्त झटका देने के लिए कई बदलाव किये हैं। भारतीय रेलवे ने चीनी कंपनी के साथ 471 करोड़ रुपए का कॉन्ट्रैक्ट रद्द किया। भारत में 4G अपग्रेड सिस्टम के लिए चीनी कंपनियों के टेलिकॉम प्रोडक्ट का इस्तेमाल भी बंद किया गया। चीन की कंपनियों के 59 मोबाइल ऐप्स पर भी पाबंदी लगी और हाइवे निर्माण कार्य में शामिल चीन की कंपनियों पर भी रोक लगाई गई।

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