Thursday, August 5, 2021
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जानिए, भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र की शक्ति।

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सावन का महीना भगवान शिव की पूजा करने के लिए काफी लोकप्रिय है। माना जाता है कि सावन के महीने में भगवान शिव की मन से पूजा करने पर बहुत सारी परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है। इस महीने में भगवान शिव का महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से अकाल मृत्यु भी टलती है, शरीर भी निरोग होता है। स्नान करते वक़्त शरीर पर पानी डालते समय इस मंत्र का जप करने से स्वास्थ्य को बहुत लाभ होता है। महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव का सबसे बड़ा मंत्र है और इसके कई स्वरूप हैं जिनका उल्लेख शिवपुराण में भी है।

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महामृत्युंजय मंत्र का मूलभाग – “ऊं भूः भुवः स्वः ऊं त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात।” सावन के महीने में भगवान शिव के इस पवित्र मंत्र का जाप करने से भगवान शिव की अनुकंपा प्राप्त होती है और जिस व्यक्ति पर शिव प्रसन्न हो जाते हैं उनका दुख अवश्य दूर होता है। कोरोना संक्रमण में शिव के महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना सेहत के लिए फायदेमंद होगा। इस मंत्र के जाप से गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है और साथ-साथ स्वास्थ्य से जुड़ी कई तकलीफें भी दूर हो जाती हैं। भगवान शिव की अराधना करने में इस मंत्र का बहुत बड़ा योगदान है। इस मंत्र के नियमित जाप से नकारात्मक विचारों को दूर रखने में भी मदद मिलती है। सावन में रुद्राभिषेक करवाने के साथ ही अगर कोई व्यक्ति महामृत्युंजय मंत्र का जाप करता है तो व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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महामृत्युंजय मंत्र विशेष मंत्र है इसलिए इसका जाप करते समय कई नियमों का पालन करना जरूरी है ताकि इसका संपूर्ण लाभ प्राप्त हो सके और किसी भी प्रकार के अनिष्ट की संभावना न हो। जाप हमेशा सुबह या शाम को करना चाहिए। दोपहर 12 बजे के बाद जाप की शुरूआत न करें। अगर कोई गंभीर कष्ट है तो कभी भी महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जा सकता है। मंत्र के जाप में उच्चारण की शुद्धता का हमेशा ध्यान रखें।।अगर घर में कोई बहुत गंभीर रूप से बीमार है तो सवा लाख बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप अनु्ष्ठान करवाएं। यह जाप अकाल मृत्यु को मात देने की क्षमता रखता है। जाप के दौरान धूप-दीप जलते रहना चाहिए। अगर संभव हो सके तो रुद्राक्ष की माला से ही जप करें। जाप करते समय शिवजी की प्रतिमा, तस्वीर, शिवलिंग या महामृत्युंजय यंत्र पास में रखना अनिवार्य है। महामृत्युंजय के सभी जप कुश के आसन के ऊपर बैठकर करें। जाप से पहले दूध या जल से शिवजी का अभिषेक करें या शिवलिंग पर चढ़ाएं। जाप के समय ध्यान पूरी तरह मंत्र में ही रहना चाहिए, मन को इधर-उधर न भटकने दें।

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